लंबी इंतजार के बाद सीबीएसई का रिजल्ट रविवार को आया। रिजल्ट आने के बाद ही एक ख़बर सोशल मीडिया में आग की तरह फैली। दरअसल आम आदमी पार्टी के तरफ से ट्विटर पर ये दावा किया गया की लगातार दूसरे साल सीबीएसई की बारहवीं के नतीजों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस दावे में ये भी कहा गया की इस साल के नतीजों में जहाँ प्राइवेट स्कूलों के 79.27% बच्चे पास हुए वहीं सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 88.27 रहा। ऐसा दावा करने वाले कोई और नही दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया हैं। सिसोदिया ने ट्विट कर के जानकारी दी "लगातार दूसरे साल सीबीएसई की बारहवीं के नतीजों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ दिया है"

इस ट्विट के बाद मानो बधाई संदेशों की झड़ी लग गई। दावे को बिना जांचे कई ऐसे भी पत्रकार हैं जिन्होंने 12वीं के परिक्षा में पास करने वाले सारे बच्चों का श्रेय मनीष सिसोदिया के सर बांधना शुरू कर दिया। हालांकि दूसरों की मेहनत पर क्रेडिट लेने वालों में सबसे पहला नाम है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का है। केजरीवाल नें सिसोदिया के ट्विट को रिट्विट करते हुऐ लिखा... "2साल पहले मैंने टीचर्ज़ को कहा था"आपका ख़याल रखना मेरा काम है, आप मेरे बच्चों का ख़याल रखना, उन्हें अच्छी शिक्षा देना" टीचर्ज़ ने कर दिखाया


इसके बाद 'आप' का सदा बचाव करने वाले कुछ बुद्धिजीवि और पत्रकारों ने मनीष सिसोदिया कि इस अप्रत्याशित सफलता पर उन्हें बधाई दी... सागरिका घोष, शिरीष कुंदर, संजुक्ता बासू और राजदीप सरदेसाई नें मनीष की सफलता पर उनके तारीफों के पुल बांध रहे हैं और मनीष भी कुछ कम फुले नही समा रहे हैं।


आम आदमी पार्टी की तरफ से दिल्ली के सरकारी स्कूलों के प्रदर्शन को इस तरह से पेश करने की कोशिश की गई है मानों उनके सत्ता में आते ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का उद्धार कर दिया हो। हालांकि इस बीच किसी नें एक बार ये जांचने की कोशिश नहीं की, कि जिस सफलता पर आम आदमी पार्टी अपनी पीठ थपथपा रही है, उसमें कुछ भी नया नहीं है। मैं ऐसा इस लिए कह रहा हूँ, क्योंकि 2014 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार नही थी और दिल्ली में राष्ट्रपति शासन था, तब भी दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चों नें ऐसा ही करिश्मा किया था।

पिछली सरकारों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बदहाल दिखाने की कोशिश में आम आदमी पार्टी ये भूल गई की यही हाल दिल्ली के सरकारी स्कूलों का तब भी थी जब 'आप' नें सिर्फ 45 दिन सरकार चलाई थी। सिर्फ इतना ही नहीं, दिल्ली के सरकारी स्कूल 2010 से लगातार दिल्ली के प्राईवेट स्कूलों से अच्छा प्रदर्शन कर रही है। तो ऐसे में थोड़ा क्रेडिट शीला दिक्षित की सरकार को और थोड़ा 'आप' के सरकार छोड़ कर भागने के बाद लगे राष्ट्रपति शासन को भी जाना चाहिए मिस्टर मिनिस्टर।


ऐसे में जो आम आदमी पार्टी की सरकार रिज़ल्ट्स को लेकर अपना पीठ थप-थपा रही है, उसे इन रिज़ल्ट्स को लेकर चिंतित होना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पास होने वालों के प्रतिशत में पिछले साल के मुकाबले 0.64 % की गिरावट आई है। इसके अलावा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट्स की संख्या 2015 के मुकाबले 2.9 % से बढ़कर 2016 में 3 .1 प्रतिशत हो गई.. तो ऐसे में अपने झूठे उपल्बधियों पर फुले नहीं समा रही आम आदमी पार्टी प्रोपागैंडा कर बच्चों की मेहनत का ताज अपने सर बांधना चाहती है और इस प्रोपागैंडा में कई वरिष्ठ पत्रकार और देश की जानी-मानी हस्तियां भी उनका साथ दे रही हैं।