मानव अधिकार चैम्पियंस कि माने तो पुरा विश्व आज जिस सबसे बड़ा संकट से निपट रहा है वो रोहिंगया मुस्लमानों के विस्थापन का है। कहने को रोहिंग्या मुस्लमान पीड़ित हैं..उनके अपने देश में उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया की दुसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हैं..। मगर उन लोगों के बारे में शायद ही कोई/कभी आवाज उठाएगा जिन्हें जिन्दगी के नाम या तो धर्म परिवर्तन मिल रहा है या मौत..।
  
खुद बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों में रह रहे रोहिंग्या वहां भी बाझ नही आ रहें हैं.. कैंपो में रह रहे रोहिंग्या मुसलमान अब हिंदू महिलाओं को अपना निशाना बना रहे हैं और उनका जबरन धर्म परिवर्तन करा रहे हैं.. हालांकि धर्म परिवर्तन जो ना करना चाहें उनके पास एक ऑप्शन भी है..मौत। जो मरना नही चाहते वो मजबूरन पांच बार नमाज पढ़ रहे हैं..।
 
बात बस इतनी भी होती तो चल जाती..लेकिन खुद खाने को दाना नहीं, तन ढकने को कपड़ा नहीं, सर पर छत नही, उनकी प्राथमिकताएं तो देखिए..आज तक पर छपी खबर के अनुसार रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश के राहत कैंपों में रह रहीं रोहिंग्या हिंदू महिलाओं के सिंदूर मिटा रहे हैं और चूड़ियां तोड़ रहे हैं.. हां ये जरूरी भी है, हो सकता है इस सिंदूर या चूड़ियों से ही धर्म खतरे में ना आ जाए। आज तक में छपे खबर की मानें तो

 "इसी महीने पूजा से रबिया बनी रोहिंग्या हिंदू महिला ने बताया कि बांग्लादेश राहत कैंपों में रोहिंग्या मुस्लिमों की ओर से हिंदू महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है. साथ ही सिंदूर मिटा दिया गया और चूड़ियां तोड़ दी गईं. रबिया ने बताया कि वह रोहिंग्या हिंदू है और शरण की उम्मीद में म्यांमार से पलायन करके यहां आई थी." 
 
वैसे राबिया जो पहले पूजा थी और पूजा करती भी रही होगी किस्मत वाली है। अगर किस्मत वाली ना होती तो जिस हिंसाग्रस्त रखाइन प्रांत के निकट 28 शवों वाला एक सामूहिक कब्रगाह मिला है, जिसमें 28 हिंदुओं के शव दफन हैं, उस की संख्या 29 भी हो सकती थी। हालांकि ये आंकड़े और बढ़ सकते है, क्योंकि हिंसाग्रस्त क्षेत्र के विस्थापित हिंदुओं ने 2 गांवों के 102 लोगों के नामों की सूची दी है जिनके मारे जाने की आशंका है। 
 
राबिया के विस्थापन की कहानी भी रोचक है। राबिया के अनुसार अगस्त महिने में उसने अपने पती को खो दिया। उसे बताया गया की मयंमार कि सेना ने उसके पती को मार दिया। हालांकि उसके पति को म्यांमार सेना ने नहीं मारा, बल्कि नाकाबपोश आतंकियों ने मौत के घाट उतारा है..। इसे धर्म से ना जोड़ें लेकिन ये आतंकी हिन्दुओं को धर्म के नाम पर गालियां दे रहे थे। अब जिन से जान बचा कर राबिया भाग रही थी, वही मद्दगार और जान बचाने वाले शिकारी निकले।
 
अब एक मासूम सा सवाल उन लोगों से जो देश में रोहिंग्या मुस्लमानों को पनाह देने कि बात कर रहें हैं। इस बात कि क्या गैरेंटी है कि भारत में जिन कैंपों में रोहिंग्या रहेंगा वहां आस पास के गैर मुस्लमानों की जबरन धर्म परिवर्तन नहीं करने की कोशिश करेंगे? इस बात कि भी क्या गैरेंटी है की अगर गैर मुस्लमान धर्म परिवर्तन को तैयार ना हो तो रोहिंग्या उनकी भी सामूहिक कब्र ना खोद दें? ये सिर्फ पूजा कि कहानी नहीं है..ऐसे कई राबिया हैं जिन्हें रोहिंग्या मुसलमान अपना शिकार बना रहे हैं।